Sunday, January 10, 2016

मोहे आई न जग से लाज...

Singer : Punkaj Udhas

गली गली में फूल बिछाओ ख़ूब मचाओ शोर
अब के पिया जो घर आए मैं नाचूँ बन के मोर
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मोहे आई न जग से लाज
मैं इतना ज़ोर से नाची आज
के घुंघरू टूट गए

कुछ मुझ पे नया जोबन भी था
कुछ प्यार का पागलपन भी था
हर पलक मेरी तीर बनी
और ज़ुल्फ़ मेरी ज़ंजीर बनी
लिया दिल साजन का जीत
वो छेड़े पायलिया ने गीत
के घुंघरू टूट गए

वो कैसी लगन बातों में थी
वो किस की महक रातों में थी
सन्देसा जो लाई पुरवाई
मैं ख़ुद से भी शरमाई
जब घर आए थे श्याम
लिया था मुझको ऐसा थाम
के घुंघरू टूट गए

धरती पे न मेरे पैर लगे
बिन पिया मुझे सब ग़ैर लगे
मुझे अंग मिले अरमानों के
मुझे पंख मिले परवानों के
जब मिला पिया का गाओं
तो ऐसा लचका मेरा पाओं
के घुंघरू टूट गए

हमको किसके ग़म ने मारा...

Singer: Ghulam Ali

दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया
जब चली सर्द हवा मैंने तुझे याद किया
इसका रोना नहीं क्यों तुमने किया दिल बरबाद
इसका ग़म है कि बहुत देर में बरबाद किया
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हमको किसके ग़म ने मारा, ये कहानी फिर सही
किसने तोड़ा दिल हमारा, ये कहानी फिर सही।

दिल के लुटने का सबब पूछो न सबके सामने
नाम आएगा तुम्हारा, ये कहानी फिर सही।

नफ़रतों के तीर खाकर दोस्तों के शहर में
हमने किस-किस को पुकारा, ये कहानी फिर सही।

क्या बताएँ प्यार की बाज़ी वफ़ा की राह में
कौन जीता कौन हारा, ये कहानी फिर सही।

Thursday, January 7, 2016

अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको

Lyricist: Qateel Shifai
Singer: Jagjeet Singh


अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको,
मैं हूँ तेरा तो नसीब अपना बना ले मुझको।
मुझसे तू पूछने आया है वफ़ा के माने,
ये तेरी सादा-दिली मार ना डाले मुझको।
ख़ुद को मैं बाँट ना डालूँ कहीं दामन-दामन,
कर दिया तूने अगर मेरे हवाले मुझको।
बादाह फिर बादाह है मैं ज़हर भी पी जाऊँ ‘क़तील’,
शर्त ये है कोई बाहों में सम्भाले मुझको।

बादाह = Wine, Spirits
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